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वातरक्त (Vatarakta) या गाउट (Gout) या गाउट आर्थराइटिस (Gouty Arthritis)
Featured Sep 03, 2026

वातरक्त (Vatarakta) या गाउट (Gout) या गाउट आर्थराइटिस (Gouty Arthritis)

वातरक्त (Vatarakta) आयुर्वेद में वर्णित एक प्रमुख व्याधि है, जिसमें वात दोष एवं रक्त की विकृति प्रमुख मानी गई है। आचार्य चरक ने इसे वातशोणित नाम से भी वर्णित किया है। मुख्य लक्षण: जोड़ों में तीव्र दर्द, सूजन, स्पर्श-असहिष्णुता, दाह/जलन, खुजली, त्वचा के वर्ण में परिवर्तन तथा गति में कठिनाई आदि। भेद: आचार्य चरक के अनुसार वातरक्त के दो प्रमुख भेद हैं— 1. उत्तान वातरक्त — त्वचा एवं मांस में स्थित। 2. गम्भीर वातरक्त — गहरे ऊतकों में स्थित। निदान हेतु प्रमुख कारण: अत्यधिक लवण, अम्ल एवं कटु आहार, विरुद्ध आहार, अति भोजन, अनियमित दिनचर्या तथा वात एवं रक्त को विकृत करने वाले आहार-विहार। चिकित्सा सिद्धांत: रोग की अवस्था एवं दोष-प्रधानता के अनुसार स्नेहन, विरेचन, बस्ति, रक्तमोक्षण, अभ्यंग, परिषेक, उपनाह एवं लेप आदि का शास्त्रों में वर्णन मिलता है। इनका प्रयोग योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के निर्देशन में ही किया जाना चाहिए। शास्त्रीय संदर्भ: चरक संहिता, चिकित्सास्थान — वातशोणित चिकित्सित अध्याय (अध्याय 29)।

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